प्रतिवेदन पर प्रतिवेदन… पर नहीं हटाया जा सका अतिक्रमण

इम्तेयाज़ अहमद, दरभंगा। 

बिहार में सर्व साधारण की शिकायतों का एक निश्चित समय-सीमा में समाधान कराने के उद्देश्य से 5 जून, 2016 से पूरे राज्य में बिहार लोक शिकायत निवारण अधिनियम लागू है।

इस कानून में तय समयसीमा के अंदर शिकायत का निष्‍पादन नहीं होने पर अधिकारी पर जुर्माना और विभागीय कार्रवाई का प्रावधान है। वरीय अधिकारी दावा करते रहे कि इस कानून के लागू होने के बाद हर आदमी की बात सुनी जा रही है, लेकिन पिछले दिनों पांच साल के बाद मुख्‍यमंत्री ने दोबारा जनता दरबार में लाेगों की शिकायतें सुननी शुरू कीं तो अधिकारियों के दावे की हवा तो निकल ही गई और मुख्यमंत्री खुद भी हैरान रह गए। मुख्यमंत्री के सामने कई ऐसे मामले आए जिसमें ये उजागर हुआ कि अधिकारी इस कानून के तहत दिए गए आदेशों का पालन कराने में लापरवाह रहे हैं।

उक्त लोक शिकायत निवारण अधिनियम के सम्बंध में अधिकारियों का ऐसा ही लापरवाह चेहरा दरभंगा ज़िले से सामने आया है जहां, परिवादी ने बहादुरपूर अंचल क्षेत्र के एकमी घाट चौक अवस्थित सड़क किनारे की सरकारी भूमि पर कुछ लोगों द्वारा अतिक्रमण के विरुद्ध अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी दरभंगा सदर, के समक्ष 3 – 10 – 2017 को परिवाद दायर किया था। जहां आवेदन देने, लोक शिकायत में अपील करने और अतिक्रमण हटाने का सिलसिला 3-10-2017 से शुरू होकर प्रथम अपीलीय होते हुए द्वितीय अपीलीय द्वारा क़रीब दर्जन बार सुनवाई के साथ 14 महीने का लम्बा सफर तय कर 1-12-18 तक चला। पर अपीलकर्ता आज तक मायूस हैं। जमीन आज भी अतिक्रमित बताई जाती है। दाव पेंच के मकड़जाल में उलझा हुआ। 

● क्या है द्वितीय अपीलीय प्राधिकार के निर्णय में

यहां, यह मैं स्पष्ट कर दूं कि द्वितीय अपीलीय प्राधिकार द्वारा दिये गए निर्णय के मुख्य मुख्य भाग को ही इस रिपोर्ट में शामिल किया जा रहा है।

ज़िला पदाधिकारी दरभंगा सह द्वितीय अपीलीय प्राधिकार कार्यालय, लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी द्वारा 1- 12- 18 को परिवाद पर दिए गए निर्णय में बताया गया है कि अपीलकर्ता प्रदीप कुमार झा, पिता स्वर्गीय दामोदर झा, ग्राम अझौल, अंचल बहादुरपुर, जिला दरभंगा द्वारा सरकारी जमीन को अतिक्रमण करने के संबंध में एक परिवाद दिनांक 3 – 10 – 2017 को अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी दरभंगा सदर, के समक्ष दायर किया था। जिसका अनन्य पंजीयन संख्या 51311010310 1703428 है। जिसमें परिवादी ने शिकायत किया है कि टुनटुन साहनी अजय साहनी एवं श्रवण साहनी आदि की जमीन पथ निर्माण विभाग द्वारा लीज पर लिया गया जिसके विरुद्ध उन्हें मुआवजा के तौर पर 17 लाख के लगभग राशि का भुगतान भी हो गया है, लेकिन मुआवजा प्राप्त करने के बाद भी वह जगह को खाली नहीं कर रहे हैं, जिस कारण उसका रास्ता अवरुद्ध है।

11- 9- 18 को सुनवाई के क्रम में जिला भू अर्जन कार्यालय से प्राप्त प्रतिवेदन के अनुसार प्रश्नगत जमीन के मौजा- अझौल थाना- 249, खाता- 24 (पुराना), 262 (नया), खेसरा- 88 (पुराना), 199 (नया) में आरोपित अतिक्रमणकारी टुनटुन साहनी से 4.36 डिस्मल जमीन लीज पर लिया गया था तथा उक्त जमीन टुनटुन साहनी के पिता द्वारा दिनांक- 21- 12- 2004 को एक कट्ठा जमीन केवाला द्वारा प्राप्त था, इस प्रकार टुनटुन साहनी की कोई जमीन लीज में लिए जाने हेतु शेष नहीं है।

निर्णय अनुसार हल्का राजस्व कर्मचारी अंचल अमीन से भी प्रतिवेदन प्राप्त हुआ। जिसके अनुसार अंचल बहादुरपुर में अतिक्रमण वाद संख्या 16/2017-18 संचालित कर अतिक्रमण वाद की कार्यवाही भी चलाई गई।

परिवादी ने दिनांक 11-1-2018 को प्रथम अपीलीय प्राधिकार सह जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, दरभंगा के समक्ष प्रथम अपीलीय दायर किया। सुनवाई के क्रम में अंचलाधिकारी बहादुरपूर द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि हल्का राजस्व कर्मचारी एंव अंचल अमीन के प्रतिवेदन के अनुसार अतिक्रमण वाद कार्यवाई नियमानुसार प्रकिर्या अंतर्गत संचालित कर चिन्हित अतिक्रमणकारी को बिहार लोक भूमि अतिक्रमण 1956 की धाराओं के तहत प्रपत्र 2 से सूचना निर्गत की गई। चिन्हित अतिक्रमणकारी द्वारा निर्धारित तिथि तक कोई सूचना या साक्ष्य कार्यालय में उपलब्ध नहीं कराया गया। तत्पश्चात नियमानुसार तिथि निर्धारित कर अंतिम सूचना निर्गत की गई। इस मामले में अंचल अधिकारी द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही अभी भी प्रक्रियाधीन है। फलस्वरूप अंचल अधिकारी बहादुरपुर उक्त अतिक्रमित स्थल को 15 दिनों के अंदर खाली कराना सुनिश्चित करेंगे। इस विवेचन के साथ दिनांक 28-3-2018 को प्रथम अपील में वाद की कार्यवाही समाप्त कर दिया गया।

इस आदेश से व्यथित होकर अपीलकर्ता द्वारा दिनांक 6-4-2018 को अधोहस्ताक्षरी के समक्ष द्वितीय अपील दायर किया गया। दिनांक 3-5-2018 को मुख्यालय से बाहर रहने के फलस्वरूप सुनवाई नहीं हो सकी। दिनांक 24 – 5 – 2018 को सुनवाई के क्रम में अंचल अधिकारी बहादुरपुर को प्रथम अपीलीय प्राधिकार के आदेश के आलोक में अचूक रूप से अतिक्रमण हटाकर प्रतिवेदन देने को कहा गया।

उक्त निदेश के बाद पूरे डेढ़ महीने बीतने के बाद दिनांक: 10 -7 – 2018 को सुनवाई के क्रम में अपीलकर्ता प्रदीप कुमार झा एवं अंचलाधिकारी बहादुरपुर के प्राधिकृत समीर आचार्य प्रभारी अंचल निरीक्षक उपस्थित हुए, अंचलाधिकारी के पत्रांक- 1233 दिनांक: 4-7-2018 द्वारा प्रतिवेदित है कि अतिक्रमण वाद संख्या 2016/ 17-18 संचालित किया गया था। अतिक्रमण वाद की सभी प्रक्रियाएं पूरी कर प्रशासनिक तौर पर अतिक्रमण हटाने हेतु दिनांक: 26-5-2018 की तिथि निर्धारित की गई थी। तदनुसार जिला एंव थाना से पुलिस बल की नियुक्ति के साथ-साथ अंचल स्तर से जेसीबी मशीन उपलब्ध कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई प्रारंभ की गई। चिन्हित अतिक्रमणकारी में परिवादकर्ता भी सम्मिलित है, जिस पर मकान बना हुआ है। अतिक्रमण सड़क के सटे परिवादकर्ता का खेसरा-85, खाता-24, खेसरा -199, भूमि रकबा 3 कट्ठा है। उक्त जमीन में से कुछ जमीन सड़क निर्माण हेतु अधिग्रहण हुआ था, जिसका मुआवजा राशि उन्हें नहीं मिला है। (यहां यह नोट करने वाली बात है कि अंचलाधिकारी खुद स्वीकार रहे हैं कि परिवादी की भूमि अधिग्रहण भी की गई, पर उन्हें मुआवज़ा भी नहीं दिया गया। अब प्रश्न यह भी है कि परिवादकर्ता को अतिक्रमणकारियों में कब और किस आधार पर चिन्हित किया गया? क्या इसके लिए परिवादकर्ता को कोई नोटिस जारी की गई? इसका उत्तर इस निर्णय में नहीं दिया गया है।) मुआवजा मिलने के पश्चात परिवादकर्ता अतिक्रमण भूमि पर बने मकान को स्वेच्छा से तोड़ दिए जाने हेतु गणमान्य व्यक्ति, थाना अध्यक्ष, बहादुरपुर के समक्ष लिखित आश्वासन दिया है। फलस्वरूप अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को तत्काल स्थगित कर दिया गया है।

सुनवाई में अपीलकर्ता द्वारा बताया गया कि इनकी जमीन लीज पर नहीं ली गई है, फलस्वरूप अतिक्रमण का प्रश्न ही नहीं है। जिसके बाद अनुमंडल पदाधिकारी दरभंगा सदर को निर्देश दिया गया कि वह अनुश्रवण कर स्पष्ट करेंगे कि नए अर्जित जमीन या सड़क चौड़ीकरण के लिए अपीलकर्ता प्रदीप कुमार झा की जमीन लीज पर ली गई है या नहीं। अंचल अधिकारी बहादुरपुर का प्रतिवेदन संतोषप्रद नहीं है। (यहां यह ध्यान रखने वाली बात है कि डीएम ने अंचलाधिकारी बहादुरपूर के उक्त प्रतिवेदन पर असन्तोष व्यक्त किया। वहीं, निदेश के बाद भी निर्णय में इस प्रश्न का उत्तर नहीं दिया गया है कि परिवादी प्रदीप कुमार झा की ज़मीन सरकार द्वारा लीज़ पर ली गई या नहीं)

इसके आगे भी अलग अलग तिथियों में सुनवाइयां होती रही, जिससे पता चलता है कि इस अतिक्रमण वाद से जुड़े संबंधित अधिकारियों की लापरवाही के मद्देनजर बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम की धारा- 8 (1) के प्रावधान अंतर्गत ₹1000 शासित अधिरोपित किया गया। निदेश दिया गया कि थाना अध्यक्ष एक सप्ताह के अंदर कोषागार चालान के माध्यम से राशि जमा कर चालान की छाया प्रति प्रस्तुत करेंगे।

इस तरह से सुनवाई आगे बढ़ते हुए दिनांक: 27-11- 2018 को सुनवाई के क्रम में अपीलकर्ता अनुपस्थित रहे। अंचलाधिकारी बहेड़ी एवं थाना अध्यक्ष बहादुरपुर राज नारायण सिंह उपस्थित। अंचल अधिकारी बहादुरपुर के पत्रांक- 2179, दिनांक: 19-11-2018 एंव पत्रांक- 2216, दिनांक: 26- 11- 2018 द्वारा प्रतिवेदित है कि दिनांक: 29-10-2018 को पूर्व से चिन्हित अतिक्रमण को हटा दिया गया है, स्थल पर पूर्व के अतिक्रमण के बगल में दोनों ओर नया अतिक्रमण किया गया है। जिसे खाली कराया जाना है। नए अतिक्रमण के संबंध में अंचल अधिकारी द्वारा मौखिक रूप से बताया गया कि अतिक्रमणकारी का कहना है कि उन्हें भूमि अधिग्रहण की राशि प्राप्त नहीं होने के कारण वे खाली नहीं कर रहे हैं। अंचलाधिकारी को भू अर्जन से संबंधित प्राधिकार को सूचना उपलब्ध कराने का निदेश दिया गया। अंचलाधिकारी का प्रतिवेदन संतोषप्रद है। ( यहां यह प्रश्न है कि अंचल अधिकारी एक तरफ़ तो बार बार अतिक्रमणकारियों से भूमि को अतिक्रमण मुक्त करा लेने का दावा करते हैं, फिर वे ये भी कह रहे हैं कि अतिक्रमणकारी का कहना है कि उन्हें उनकी भूमि अधिग्रहण की राशि प्राप्त नहीं हुई इस लिए वे ज़मीन खाली नहीं कर रहे हैं, जिसे वे मान भी लेते हैं, कैसे?)

थाना अध्यक्ष बहादुरपुर का डीआर नंबर 2321/18, दिनांक: 20-11- 2018 दिनांक: 27-11-2018 को प्रस्तुत किया गया है। प्रस्तुत प्रतिवेदन के साथ संलग्न दिनांक: 27- 11- 2018 के प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि प्रासंगिक परिवाद प्रदीप कुमार झा बनाम अजय साहनी टुनटुन साहनी व श्रवण साहनी से संबंधित है। इनका कहना है कि दिनांक: 23-10- 2018 की सुनवाई की जानकारी नहीं होने के कारण वे उपस्थित नहीं हो सके। इनका प्रतिवेदन है कि दिनांक: 29-10- 1018 को पुनः अतिक्रमण हटाते हुए पुनः अतिक्रमण ना हो इस निमित्त अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध बहादुरपुर थाना कांड संख्या 508/18, दिनांक: 26-11- 2018 को धारा- 188, 189, 353, दर्ज कर लिया गया है। थाना अध्यक्ष बहादुरपुर को दिनांक: 23-10-2018 की सुनवाई की सूचना दिनांक: 22-10- 2018 को दूरभाष के माध्यम से दी गई थी। फलस्वरूप सुनवाई की जानकारी नहीं होने का कथन सही नहीं है। थाना अध्यक्ष अर्थदंड की राशि ₹1000 कोषागार चालान के माध्यम से जमा कर एक सप्ताह के अंदर चालान की छाया प्रति प्रस्तुत करेंगे। अंचलाधिकारी बहादुरपुर का प्रतिवेदन संतोषप्रद है। इस तरह द्वितीय अपीलीय प्राधिकार द्वारा अपील वाद की कार्यवाही समाप्त करते हुए वाद को निष्पादित किया गया।

यहां मैं फिर से बता दूं कि उक्त परिवाद दिनांक: 3-10-2017 से शुरू होकर प्रथम अपीलीय होते हुए द्वितीय अपीलीय द्वारा क़रीब दर्जन भर सुनवाई के साथ 14 महीने का लम्बा सफर तय कर 1-12-18 तक चला। पर अपीलकर्ता आज तक मायूस हैं। जमीन आज भी अतिक्रमित है जबकि, आख़री सुनवाई को भी बीते हुए क़रीब 2 वर्ष 10 महीने होने को है और अगर परिवाद की प्रारंभिक तिथि से जोडेंगे तो क़रीब 4 वर्ष बीतने को है।

अलग अलग सुनवाइयों में अधिकारियों के प्रतिवेदनों से पता चलता है कि चाहे अंचलाधिकारी बहादुरपूर हो या अनुमंडल पदाधिकारी, दरभंगा सदर, या फिर थाना बहादुरपूर इन सभी ने इस मामले में दिए गए निर्देशों के पालन में उदासीनता दिखाई हालांकि, अंचलाधिकारी बहादुरपूर अपने प्रतिवेदनों में ये दावा करते हैं कि उक्त अतिक्रमण को क़रीब 4 बार हटाया गया है, लेकिन पुनः अतिक्रमण कर लिया जाता है जबकि, अतिक्रमण दोबारा न हो इसके लिए थाना बहादुरपूर को बार बार स्मारित किया गया लेकिन थाना स्तर से अतिक्रमण रोकने हेतु कार्यवाई में ढिलाई बरती गई।

क्या कहना है परिवादी पक्ष का

परिवादी पक्ष का आरोप है कि कभी भी प्रशासन ने पूर्ण अतिक्रमण नहीं हटाया, हमेशा खानापूर्ति करके चले जाते थे, यही कारण है कि लोक शिकायत में मामला इतना लम्बा चला। आज भी उक्त भूमि अतिक्रमणमुक्त नहीं हो सकी है। परिवादी पक्ष का आरोप है कि प्रखंड के पदाधिकारियों से लेकर ज़िला के तमाम वरीय अधिकारियों तक इस मामले को मैंने पहुंचाया, काफ़ी गुहार लगाया मिन्नतें कीं, लेकिन किसी ने भी मामले को गंभीरता से नहीं लिया। परिवादी पक्ष का कहना है कि अगर जन लोक शिकायत अधिनियम का रिज़ल्ट ऐसा ही होता है तो, फिर ये किस काम का? के जिस में वर्षों तक लोग सुनवाई में धक्के खाता रहे और फिर अगर कोइ निर्णय निकल कर आए भी तो उसका पालन ही न हो!

इस पूरे मामले पर संबंधित पदाधिकारियों से सम्पर्क कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई लेकिन वरीय अधिकारियों से सम्पर्क नहीं हो पाया, अंचलाधिकारी बहादुरपूर ने बस इतना बताया कि मामला अतिक्रमणकारियों द्वारा उच्च न्यायालय में लंबित है।