दरभंगा: सरकार के झूठ और गलत फैसलों को स्वीकार करना जनता की सबसे बड़ी भूल: नज़रे आलम

नज़रे आलम, अध्यक्ष, AIMBK (फ़ाइल फ़ोटो)

सरकार के झूठ और गलत फैसलों को स्वीकार करना जनता की सबसे बड़ी भूल: नजरे आलम

आत्मनिर्भर बनाने वाली सरकार ने जनता को महामारी में मरने को छोड़ा!

कोरोना से कम, बगैर इलाज और दहशत से मर रहे हैं अधिक लोग: बेदारी कारवाँ

दरभंगा: (प्रेस रिलीज़) ऑल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवां के अध्यक्ष नज़रे आलम ने एक प्रेस रिलीज़ जारी कर मोदी सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा है कि, मोदी जी अब इससे बुरा दिन और नहीं आ सकता भारत का। सत्ता के नशे में इतने अंधे हो गए कि पूरे देश से मानवता को खत्म कर दिया। भारत की जनता मासूम है, ये जो चिताएं जल रही हैं और लोग छाती पीट रहे हैं इसकी हाय से बच नहीं सकते। आपने तो देश को पहले ही बर्बाद कर दिया था धर्म का जहर फैलाकर। लोगों के अंदर ऐसा धार्मिक जहर भर दिया के लोग एक दूसरे का खून तक बहाने लगे। देश नफरत और धर्म की राजनीति में जलने लगा, लेकिन आपका मन इससे भी नहीं भरा और ये कोरोना की महामारी से भी फायदा उठाने से बाज नहीं आए पुरी इंसानियत को ही देश से खत्म कर डाला। कोरोना से लोगों को लड़ने का हौसला देने की जगह दलाल मिडिया के जरिए ऐसा दहशत फैला दिया के लोग अपने पराए से भाग रहे हैं, अंतिम संस्कार के लिए लाश तक नहीं ले रहे। पूर्व में देश में इससे भी बड़ी महामारी फैली तब भी देश और लोग इतना नहीं टूटे जितना कोरोना से लोग टूट चुके हैं। आपने और आपकी सरकार ने अपनी सारी नाकामी छुपाने के लिए कोरोना को भारत की जनता पर थोप दिया और लाखों लोग बिना इलाज के मर गए और लगातार मर ही रहे हैं। भारत के स्वास्थ्य सिस्टम को पूरी दुनिया ने देख लिया। जिस देश का प्रधानमंत्री अपने देश के नागरिकों के इलाज के लिए हॉस्पिटल तक में सुविधा नहीं दे सकता समझा जा सकता है उस देश की जनता का क्या हाल होगा। ना ही सही हॉस्पिटल, ना ही हॉस्पिटल में बेड, ना ही वेंटिलेटर, ना ही ऑक्सीजन, ना ही दवा की सुविधा है। लोग कोरोना से कम सही इलाज नहीं होने के कारण ज्यादा मर रहे हैं। भारत की इस हालत पर तरस खाकर दूसरे कई देशों से ऑक्सीजन आदि की सहायता और सहयोग देने की खबरें भी आम लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

इस गंभीर हालत पर चिंता जताते हुए नजरे आलम ने कहा कि जिस भयावह हालात से आज भारत के लोग गुजर रहे हैं वह बहुत ही चिंता जनक है। सरकार कोरोना का आंकड़ा दिखा कर देश के लोगों में लगातार भय का माहौल बना रही है। बिना बिमारी के भी लोग दहशत में मर रहे हैं। सरकार के मुखिया और नेता सत्ता में बने रहने के लिए चुनाव में मस्त हैं जनता को महामारी में आत्मनिर्भर बनाकर मरने को छोड़ दिया है। आलम ने कहा स्वाभाविक है सरकार की इन सारी हरकतों का जिम्मेदार भी हम भारत के नागरिक ही हैं। जब जनता सरकार के अच्छे बुरे हर फैसले को आंख मूंद कर स्वीकार करने लगे तो जनता से चुनी सरकार ही हिटलर वाली निती पर काम करने लगती है। मोदी एंड कंपनी भी ऐसा ही कुछ कर रही है फिर भी जनता खुशी खुशी सरकार के हिटलर वाले फरमान को स्वीकार कर रही है जबकि होना तो यह चाहिए के निकम्मी सरकार के खिलाफ एकजुट होकर सड़कों पर उतरे और सरकार को जिम्मेदारी का एहसास दिलाए। लेकिन ऐसा संभव नहीं लगता क्योंकि देश की बेश्तर आबादी के दिमाग में कश्मीर का 370, बाबरी मस्जिद, तीन तलाक, कृषि कानून, मॉबलिंचिग, दहशतगर्दी, गाय गोबर, हिंदू राष्ट्र, हिंदू खतरे में है, मुसलमानों को देश से निकालने जैसी चीजें इस कदर भर दिया गया है लोग इससे बाहर नहीं निकल रहे। लोग अपने और अपने बच्चों के भविष्य के बारे में सोचना तक छोड़ दिया, पूरे देश में शिक्षा का मंदिर, धार्मिक स्थल, इबादतगाहों को सरकार ने अपने कब्जे में कर लिया है यानी अब लोग सरकार के आदेशानुसार ही शिक्षा, पूजा, इबादत आदि कर सकेंगे। ऐसी स्थिति 70 सालों में पहली बार देखने को मिल रही है, जो सरकार धार्मिक जहर फैलाकर सत्ता में आई आज जनता उसी के हाथों धार्मिक खिलौना बन कर रह गई है। इतना ही नहीं जिस देश के लोग अपने बाप, मां, भाई, बहने, बेटा, बेटी और रिश्तेदार की लाश पैदल कंधे पर, साईकिल पर, ऑटो पर ढो़ता हो और उसका समाज तमाशा देख रहा हो तो समझ सकते हैं, इससे ज्यादा शर्मनाक, अफसोसनाक, हृदयविदारक दृश्य नहीं हो सकता। आजादी के बाद ये पहला मौका है जिसमें मोदी सरकार ने न सिर्फ जनता को मुर्ख और गुलाम बनाया है बल्कि दिमागी तौर पर सोचने और अच्छा बुरा समझने तक का फर्क मिटा दिया है।

उन्होंने कहा कि अब भी वक्त है जनता धर्म, जाती, मंदिर, मस्जिद और सामाजिक स्तर पर फैले आपसी नफरत को मिटाकर एकजुट होकर निकम्मी सरकार के खिलाफ सड़कों पर आए तभी देश को बचाया जा सकता है। नजरे आलम ने कहा देश नफरत से नहीं मुहब्बत और आपसी भाईचारे से चलेगा साथ ही धर्म को राजनीति से बिल्कुल ही दूर रखा जाए न कोई पार्टी, न कोई सरकार किसी के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करे। सरकार या पार्टी को कोई अधिकार नहीं के वह तय करे के कब किसको पूजा और इबादत करना है या नहीं करना है।

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