दरभंगा में अवैध ढंग से चलाया जा रहा पैथो लैब, मरीज़ की जान से किया जा रहा खिलवाड़ 

● दरभंगा में अवैध ढंग से चलाया जा रहा पैथो लैब, मरीज़ की जान से किया जा रहा खिलवाड़ 
● रजिस्टर्ड डॉक्टर के बजाय अन्य लोग करते हैं जांच और बनाते हैं रिपोर्ट 
● डॉक्टर संतोष कुमार के नाम से बेंता स्थित चल रहा यह “एस आर पैथो लैब”
दरभंगा शहर में हॉस्पिटल रोड स्थित बेंता चौक मरीज मंडी के नाम से चर्चित है। यहाँ कई जिलों से मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद लिए आते हैं। मरीजों को यहां कितना लाभ मिल पाता है यह बता पाना मुश्किल है, लेकिन यहां अवैध ढंग से चलाए जा रहे एक पैथो लैब की असलियत सामने आने के बाद आप स्वतः समझ लेंगे के मरीजों को नुकसान कितना होता होगा।
दरअसल, सूत्रों से मिली सूचना पर जब पत्रकार बेंता चौक स्थित ताज पैलेस में संचालित “एस आर पैथो लैब” पहुंचकर जानकारी लिया तो उस वक्त लैब का संचालन कर रहे राहुल कुमार नाम के व्यक्ति ने बेख़ौफ़ होकर कैमरे पर बताया कि यह लैब डीएमसीएच में पोस्टेड डॉ. संतोष कुमार के नाम पर रजिस्टर्ड है। पर इसे मैं और मेरे एक अन्य पार्टनर मिलकर चलाते हैं। राहुल ने बताया कि इसके बदले हम डॉ. संतोष कुमार को 20 हज़ार रुपए महीना देते हैं। आगे राहुल ने बताया कि हम इस लैब में पैथो से सम्बंधित सभी तरह के जांच करते हैं और रिपोर्ट बनाकर मरीजों को दे देते हैं। जब राहुल से पूछा गया कि डॉ. संतोष कुमार लैब में कब कब आते हैं, तो उसने बताया कि डॉक्टर साहब सप्ताह में कभी कभार आ जाते हैं। उसने बेख़ौफ़ होकर बताया कि वैसे तो डॉक्टर साहब मरीजों की जांच रिपोर्ट बनाने के लिए अपना हस्ताक्षर युक्त लेटर पैड हमें दे जाते हैं, लेकिन जब कभी वह लेटर पैड ख़त्म हो जाता है तो इमरजेंसी में डॉक्टर साहब का हस्ताक्षर मैं ख़ुद ही कर रिपोर्ट बनाकर मरीजों को दे देता हूं।
वहीं, जब पैथो लैब संचालन के नियम को लेकर सिविल सर्जन दरभंगा से पूछा गया तो उन्होंने साफ़ तौर पर बताया कि किसी भी पैथो लैब में जांच और रिपोर्ट वही डॉक्टर कर सकते हैं जिनके नाम से लैब निबंधित है। निबंधित डॉक्टर के बजाय अगर कोई अन्य व्यक्ति जांच और रिपोर्ट तैयार करता है तो वैसे लैब को जांच उपरांत कार्यवाइ करते हुए तत्काल सील करते हुए आगे की विधिवत कार्यवाइ की जाएगी। वहीं, इस मामले में अभी हमें उक्त लैब के कथित निबंधित डॉ. संतोष कुमार का पक्ष नहीं मिल पाया है। अब ऐसे में यह सवाल खड़ा होता है कि आख़िर इस तरह के अवैध लैब किसके प्रोत्साहन से चलता है, जहां कभी भी किसी मरीज़ की जान के लिए ख़तरा पैदा हो सकता है। सूत्र बताते हैं कि संबंधित विभाग के कर्मियों और प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों की मिलीभगत से ही दरभंगा में सैकड़ों ऐसे अवैध जांच घर धड़ल्ले से चलाए जा रहे हैं, जहां मोटे कमीशन का खेल चलता है! अगर ज़िला प्रशासन सख़्ती से जांच करे तो अवैध पैथो लैब का यह गोरखधंधा बन्द हो सकता है, जिससे के आम लोगों को ऐसे धोखेबाजों से राहत मिल सकती है।